| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना » श्लोक 13-14 |
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| | | | श्लोक 3.98.13-14  | त्रसदस्युस्तु तान् दृष्ट्वा प्रत्यगृह्णाद् यथाविधि।
अभिगम्य महाराज विषयान्ते महामना:॥ १३॥
अर्चयित्वा यथान्यायमिक्ष्वाकू राजसत्तम:।
समस्तांश्च ततोऽपृच्छत् प्रयोजनमुपक्रमे॥ १४॥ | | | | | | अनुवाद | | महाराज! राजाओं में श्रेष्ठ और इक्ष्वाकुवंशी महामनस्वी त्रसदस्यु ने उन्हें आते देख राज्य की सीमा पर पहुँचकर उन सबका यथोचित स्वागत किया और उनसे उनके आने का प्रयोजन पूछा॥13-14॥ | | | | Maharaj! The great-minded Trasadasyu, the best of the kings and belonging to the Ikshvaku dynasty, seeing them coming, reached the border of the kingdom and welcomed them all in a proper manner and asked them the purpose of their visit.॥ 13-14॥ | | ✨ ai-generated | | |
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