श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 97: महर्षि अगस्त्यका लोपामुद्रासे विवाह, गंगाद्वारमें तपस्या एवं पत्नीकी इच्छासे धनसंग्रहके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.97.5 
तं तथा दु:खितं दृष्ट्वा सभार्यं पृथिवीपतिम्।
लोपामुद्राभिगम्येदं काले वचनमब्रवीत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा और रानी को इतना दुःखी देखकर लोपामुद्रा उनके पास गई और समयानुसार बोली-॥5॥
 
Seeing the King and the Queen so sad, Lopamudra went to them and spoke as per the time -॥ 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd