तत: स भार्यामभ्येत्य प्रोवाच पृथिवीपति:।
महर्षिर्वीर्यवानेष क्रुद्ध: शापाग्निना दहेत्॥ ४॥
अनुवाद
तब विदर्भराज अपनी पत्नी के पास गए और बोले, 'प्रिये! ये अगस्त्य ऋषि बड़े शक्तिशाली हैं। यदि इन्हें क्रोध आ जाए तो ये हमें शाप की अग्नि से जलाकर भस्म कर सकते हैं।'
Then the King of Vidarbha went to his wife and said, 'Dear! This sage Agastya is very powerful. If he gets angry, he can burn us to ashes with the fire of curse.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)