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mahabharat 3.97.25: अगस्त्य बोले, "हे शुभ! यदि आपने अपनी यह इच्छा पूरी करने का निश्चय कर लिया है, तो मैं धन लेकर आता हूँ। आप यहीं रहकर अपनी इच्छानुसार धर्म का पालन करें।"   |   mahabharat अध्याय 3.97: महर्षि अगस्त्यका लोपामुद्रासे विवाह, गंगाद्वारमें तपस्या एवं पत्नीकी इच्छासे धनसंग्रहके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 97: महर्षि अगस्त्यका लोपामुद्रासे विवाह, गंगाद्वारमें तपस्या एवं पत्नीकी इच्छासे धनसंग्रहके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.97.25 
अगस्त्य उवाच
यद्येष काम: सुभगे तव बुद्धॺा विनिश्चित:।
हर्तुं गच्छाम्यहं भद्रे चर काममिह स्थिता॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्य बोले, "हे शुभ! यदि आपने अपनी यह इच्छा पूरी करने का निश्चय कर लिया है, तो मैं धन लेकर आता हूँ। आप यहीं रहकर अपनी इच्छानुसार धर्म का पालन करें।"
 
Agastya said, "O auspicious one! If you have determined to fulfil this desire of yours, then I am going to bring the money. You stay here and practise the Dharma as per your wish."
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायामगस्त्योपाख्याने सप्तनवतितमोऽध्याय:॥ ९७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें अगस्त्योपाख्यानविषयक सत्तानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)