श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 97: महर्षि अगस्त्यका लोपामुद्रासे विवाह, गंगाद्वारमें तपस्या एवं पत्नीकी इच्छासे धनसंग्रहके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.97.23 
लोपामुद्रोवाच
अल्पावशिष्ट: कालोऽयमृतोर्मम तपोधन।
न चान्यथाहमिच्छामि त्वामुपैतुं कथंचन॥ २३॥
 
 
अनुवाद
लोपामुद्रा बोली - हे तपधान! मेरे रजोधर्म का अब थोड़ा ही समय शेष है। जैसा मैंने तुम्हें पहले ही बताया है, उसके अतिरिक्त मैं तुम्हारे साथ किसी अन्य प्रकार से समागम नहीं करना चाहती हूँ॥ 23॥
 
Lopamudra said - O Tapadhan! Only a little time is left of my period. I do not wish to have intercourse with you in any other manner except as I have already told you.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)