अगस्त्य उवाच
न ते धनानि विद्यन्ते लोपामुद्रे तथा मम।
यथाविधानि कल्याणि पितुस्तव सुमध्यमे॥ २०॥
अनुवाद
अगस्त्य बोले, "हे सुन्दर कमर वाली कल्याणी लोपामुद्रा! तुम्हारे पिता के घर में जैसा धन और वैभव है, वैसा न तो तुम्हारे पास है और न मेरे पास (फिर यह कैसे सम्भव है?)"
Agastya said, "O Kalyani Lopamudra with a beautiful waist! The kind of wealth and splendor that your father has in his house, neither you nor I have it (then how is this possible?)"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)