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असंशयं प्रजाहेतोर्भार्यां पतिरविन्दत।
या तु त्वयि मम प्रीतिस्तामृषे कर्तुमर्हसि॥ १६॥
अनुवाद
'महर्षि! इसमें संदेह नहीं कि मेरे पति ने सन्तान प्राप्ति के लिए इस पत्नी को स्वीकार किया है, किन्तु मेरे हृदय में आपके प्रति जो प्रेम है, उसे भी आप पूर्ण करें॥16॥
'Maharshi! There is no doubt that my husband has accepted this wife for the sake of having a child, but you should also fulfil the love I have for you in my heart.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥