Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.96.d1h-15: तब अगस्त्यजी ने लटके हुए पितरों से पूछा, "तुम सब यहाँ क्यों लटके हुए हैं, काँप रहे हो और नीचे की ओर मुँह किए हुए हो?" यह सुनकर वैदिक पितरों ने उत्तर दिया, "वंश के नाश की आशंका के कारण हम इस दयनीय स्थिति का सामना कर रहे हैं।"॥15॥ | mahabharat अध्याय 3.96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब अगस्त्यजी ने लटके हुए पितरों से पूछा, "तुम सब यहाँ क्यों लटके हुए हैं, काँप रहे हो और नीचे की ओर मुँह किए हुए हो?" यह सुनकर वैदिक पितरों ने उत्तर दिया, "वंश के नाश की आशंका के कारण हम इस दयनीय स्थिति का सामना कर रहे हैं।"॥15॥
Then Agastya asked the hanging Pitris, “Why are you all hanging here, shaking and facing down?” On hearing this the Vedic Pitris replied, “We are facing this miserable situation because of the possibility of extinction of the lineage of progeny.”॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥