श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.96.9 
स चाह्वयति यं वाचा गतं वैवस्वतक्षयम्।
स पुनर्देहमास्थाय जीवन् स्म प्रत्यदृश्यत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इल्वल में यह शक्ति थी कि यदि वह यमलोक गए किसी भी प्राणी को नाम लेकर पुकारता तो वह पुनः शरीर धारण करके जीवित प्रकट हो जाता था॥9॥
 
Ilval had the power that if he called any creature that had gone to Yamaloka by name, it would again take a body and appear alive.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)