श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.96.4 
लोमश उवाच
इल्वलो नाम दैतेय आसीत् कौरवनन्दन।
मणिमत्यां पुरि पुरा वातापिस्तस्य चानुज:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
लोमशजी बोले- हे कौरवपुत्र! पूर्वकाल की कथा है, इस बहुमूल्य नगरी में इल्वल नामक एक राक्षस रहता था। वातापि उसका छोटा भाई था।
 
Lomashji said- O son of Kaurava! It is a story of the past, in this precious city a demon named Ilval lived. Vaataapi was his younger brother.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)