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mahabharat 3.96.30: जब पिता ने विदर्भ की राजकुमारी को युवावस्था में प्रवेश करते देखा तो वह विचार करने लगे कि उनका विवाह किससे किया जाए।   |   mahabharat अध्याय 3.96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.96.30 
वैदर्भीं तु तथायुक्तां युवतीं प्रेक्ष्य वै पिता।
मनसा चिन्तयामास कस्मै दद्यामिमां सुताम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब पिता ने विदर्भ की राजकुमारी को युवावस्था में प्रवेश करते देखा तो वह विचार करने लगे कि उनका विवाह किससे किया जाए।
 
When the father saw the princess of Vidarbha entering her youth, he began to ponder over whom he should marry her.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां अगस्त्योपाख्याने षण्णवतितमोऽध्याय:॥ ९६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें अगस्त्योपाख्यानविषयक छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९६॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३० १/२ श्लोक हैं]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)