Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.96.29: वह राजकुमारी सत्यवती अप्सराओं से भी अधिक सुन्दर थी। उसने अपने विनम्र स्वभाव से अपने पिता और सम्बन्धियों को संतुष्ट कर दिया था।   |   mahabharat अध्याय 3.96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.96.29 
सा तु सत्यवती कन्या रूपेणाप्सरसोऽप्यति।
तोषयामास पितरं शीलेन स्वजनं तथा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वह राजकुमारी सत्यवती अप्सराओं से भी अधिक सुन्दर थी। उसने अपने विनम्र स्वभाव से अपने पिता और सम्बन्धियों को संतुष्ट कर दिया था।
 
That princess Satyavati was even more beautiful than the Apsaras. She had satisfied her father and relatives with her modest nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)