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mahabharat 3.96.28: यद्यपि वह युवती थी, विनय और सदाचार से परिपूर्ण थी, फिर भी महात्मा अगस्त्य के भय से किसी राजकुमार ने उसे नहीं चुना ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 3.96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.96.28 
यौवनस्थामपि च तां शीलाचारसमन्विताम्।
न वव्रे पुरुष: कश्चिद् भयात् तस्य महात्मन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि वह युवती थी, विनय और सदाचार से परिपूर्ण थी, फिर भी महात्मा अगस्त्य के भय से किसी राजकुमार ने उसे नहीं चुना ॥28॥
 
Even though she was young and full of modesty and good conduct, no prince chose her because of the fear of Mahatma Agastya. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)