vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना
»
श्लोक 28
श्लोक
3.96.28
यौवनस्थामपि च तां शीलाचारसमन्विताम्।
न वव्रे पुरुष: कश्चिद् भयात् तस्य महात्मन:॥ २८॥
अनुवाद
यद्यपि वह युवती थी, विनय और सदाचार से परिपूर्ण थी, फिर भी महात्मा अगस्त्य के भय से किसी राजकुमार ने उसे नहीं चुना ॥28॥
Even though she was young and full of modesty and good conduct, no prince chose her because of the fear of Mahatma Agastya. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×