vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना
»
श्लोक 27
श्लोक
3.96.27
सा स्म दासीशतवृता मध्ये कन्याशतस्य च।
आस्ते तेजस्विनी कन्या रोहिणीव दिवि प्रभा॥ २७॥
अनुवाद
सौ दासियों और सौ कन्याओं में वह तेजस्वी कन्या आकाश में सूर्य और तारों में रोहिणी के समान शोभायमान थी ॥27॥
Among the hundred maids and hundred girls, that bright girl was as beautiful as the sun in the sky and Rohini in the stars. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×