Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.96.25: महाराज! वह राजकुमारी सुन्दर रूप धारण करके जल में कमल के समान तथा यज्ञवेदी पर प्रज्वलित अग्नि की श्वेत ज्वाला के समान शीघ्रता से विचरण करने लगी। | mahabharat अध्याय 3.96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ववृधे सा महाराज बिभ्रती रूपमुत्तमम्।
अप्स्विवोत्पलिनी शीघ्रमग्नेरिव शिखा शुभा॥ २५॥
अनुवाद
महाराज! वह राजकुमारी सुन्दर रूप धारण करके जल में कमल के समान तथा यज्ञवेदी पर प्रज्वलित अग्नि की श्वेत ज्वाला के समान शीघ्रता से विचरण करने लगी।
Maharaj! That princess having assumed a beautiful form started moving rapidly like a lotus in water and like the white flame of fire blazing on the sacrificial altar.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥