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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.96.24 
अभ्यनन्दन्त तां सर्वे ब्राह्मणा वसुधाधिप।
लोपामुद्रेति तस्याश्च चक्रिरे नाम ते द्विजा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उस समय सभी ब्राह्मणों ने राजा का स्वागत किया और कन्या का नाम 'लोपामुद्रा' रखा।
 
O King! At that time all the Brahmins welcomed the King and named the girl 'Lopamudra'. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)