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mahabharat 3.96.19: तब भगवान अगस्त्य को संतान प्राप्ति की चिंता हुई और उन्होंने अपनी पसंद की संतान उत्पन्न करने के लिए एक उपयुक्त पत्नी की खोज की, लेकिन उन्हें कोई भी उपयुक्त स्त्री नहीं मिली।   |   mahabharat अध्याय 3.96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.96.19 
तत: प्रसवसंतानं चिन्तयन् भगवानृषि:।
आत्मन: प्रसवस्यार्थे नापश्यत् सदृशीं स्त्रियम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान अगस्त्य को संतान प्राप्ति की चिंता हुई और उन्होंने अपनी पसंद की संतान उत्पन्न करने के लिए एक उपयुक्त पत्नी की खोज की, लेकिन उन्हें कोई भी उपयुक्त स्त्री नहीं मिली।
 
Then Lord Agastya, being concerned about having children, searched for a suitable wife to carry a child of his choice, but he could not find any suitable woman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)