श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.96.18 
स तानुवाच तेजस्वी सत्यधर्मपरायण:।
करिष्ये पितर: कामं व्येतु वो मानसो ज्वर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तब सत्य और धर्म में तत्पर रहने वाले महापुरुष अगस्त्य ने उनसे कहा - 'पितरों! मैं आपकी इच्छा पूर्ण करूँगा। आपकी मानसिक चिन्ता दूर हो जाए।'॥18॥
 
Then the illustrious Agastya, devoted to truth and religion, said to them, 'Ancestors! I will fulfill your wish. Your mental anxiety should be dispelled.'॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)