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mahabharat 3.96.17: 'अगस्त्य! यदि आप हमारे लिए उत्तम संतान उत्पन्न कर सकें, तो हम इस नरक से मुक्त हो सकते हैं और बेटा! आप भी मोक्ष प्राप्त करेंगे।'॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.96.17 
यदि नो जनयेथास्त्वमगस्त्यापत्यमुत्तमम्।
स्यान्नोऽस्मान्निरयान्मोक्षस्त्वं च पुत्राप्नुया गतिम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'अगस्त्य! यदि आप हमारे लिए उत्तम संतान उत्पन्न कर सकें, तो हम इस नरक से मुक्त हो सकते हैं और बेटा! आप भी मोक्ष प्राप्त करेंगे।'॥17॥
 
'Agastya! If you can produce a good child for us, then we can be freed from this hell and son! You too will attain salvation.'॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)