श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.96.16 
ते तस्मै कथयामासुर्वयं ते पितर: स्वका:।
गर्तमेतमनुप्राप्ता लम्बाम: प्रसवार्थिन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्यजी के पूछने पर उन्होंने बताया कि 'हम आपके पूर्वज हैं। हम सन्तान प्राप्ति की आशा से इस गड्ढे में लटके हुए हैं।'॥16॥
 
When Agastya asked them, they told him that 'We are your ancestors. We are hanging in this pit in the hope of having a child.'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)