श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 96: इल्वल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.96.13 
एवं स ब्राह्मणान् राजन् भोजयित्वा पुन: पुन:।
हिंसयामास दैतेय इल्वलो दुष्टचेतन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस प्रकार दुष्ट हृदय वाले इल्वल नामक राक्षस ने ब्राह्मणों को बार-बार भोजन कराया और फिर अपने भाई के द्वारा उन्हें मरवा डाला (इसीलिए अगस्त्य मुनि ने वातपिका का नाश किया था)॥13॥
 
O King! In this manner the evil-hearted demon Ilvala repeatedly fed the Brahmins and then got them killed by his brother (that is why the sage Agastya destroyed Vatapika).॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)