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mahabharat 3.95.3-5: भरत! हे राजन! वहाँ देवताओं, पितरों और ब्राह्मणों को बार-बार तृप्त करके वे सभी पाण्डव कन्या तीर्थ, अश्वतीर्थ, गोतीर्थ, कालाकोटि और वृषप्रस्थगिरि में ठहरे और बाहुदा नदी में स्नान किया। हे पृथ्वी के स्वामी! तत्पश्चात् वे देवताओं की यज्ञभूमि प्रयाग पहुँचे और वहाँ गंगा-यमुना के संगम पर स्नान किया। वहाँ स्नान करके सत्यनिष्ठ पाण्डव कुछ दिनों तक घोर तपस्या में लीन रहे।   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 3-5
 
 
श्लोक  3.95.3-5 
तत्र देवान् पितॄन् विप्रांस्तर्पयित्वा पुन: पुन:।
कन्यातीर्थेऽश्वतीर्थे च गवां तीर्थे च भारत।
कालकोटॺां वृषप्रस्थे गिरावुष्य च पाण्डवा:॥ ३॥
बाहुदायां महीपाल चक्रु: सर्वेऽभिषेचनम्।
प्रयागे देवयजने देवानां पृथिवीपते॥ ४॥
ऊषुराप्लुत्य गात्राणि तपश्चातस्थुरुत्तमम्।
गङ्गायमुनयोश्चैव संगमे सत्यसंगरा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भरत! हे राजन! वहाँ देवताओं, पितरों और ब्राह्मणों को बार-बार तृप्त करके वे सभी पाण्डव कन्या तीर्थ, अश्वतीर्थ, गोतीर्थ, कालाकोटि और वृषप्रस्थगिरि में ठहरे और बाहुदा नदी में स्नान किया। हे पृथ्वी के स्वामी! तत्पश्चात् वे देवताओं की यज्ञभूमि प्रयाग पहुँचे और वहाँ गंगा-यमुना के संगम पर स्नान किया। वहाँ स्नान करके सत्यनिष्ठ पाण्डव कुछ दिनों तक घोर तपस्या में लीन रहे।
 
Bharata! O King! After satisfying the gods, ancestors and Brahmins there again and again, all those Pandavas stayed in Kanya Tirtha, Ashvatirtha, Gotirtha, Kalakoti and Vrishprasthagiri and took bath in river Bahuda. O Lord of the earth! Thereafter they reached Prayag, the sacrificial ground of the gods and took bath in the confluence of Ganga and Yamuna there. The truthful Pandavas after taking bath there remained engaged in great penance for a few days.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)