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mahabharat 3.95.27: 'गयाने ने समस्त देवताओं को हवि देकर पूर्णतया संतुष्ट कर दिया है; अब वह दूसरों द्वारा दी गई हवि कैसे ग्रहण कर सकेगा?॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.95.27 
कथं तु देवा हविषा गयेन परितर्पिता:।
पुन: शक्ष्यन्त्युपादातुमन्यैर्दत्तानि कानिचित्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'गयाने ने समस्त देवताओं को हवि देकर पूर्णतया संतुष्ट कर दिया है; अब वह दूसरों द्वारा दी गई हवि कैसे ग्रहण कर सकेगा?॥ 27॥
 
'Gayane has thoroughly satisfied all the gods with offerings; now how will he be able to accept offerings given by others?॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)