Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.95.26: 'महान राजर्षि गय ने अपने यज्ञ में जो व्यय किया, वह तो पूर्वकाल के राजाओं ने भी नहीं किया था और भविष्य में भी कोई अन्य ऐसा कर सकेगा, यह सम्भव नहीं है। | mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तत् पूर्वे जनाश्चक्रुर्न करिष्यन्ति चापरे।
गयो यदकरोद् यज्ञे राजर्षिरमितद्युति:॥ २६॥
अनुवाद
'महान राजर्षि गय ने अपने यज्ञ में जो व्यय किया, वह तो पूर्वकाल के राजाओं ने भी नहीं किया था और भविष्य में भी कोई अन्य ऐसा कर सकेगा, यह सम्भव नहीं है।
'The expenditure incurred by the great Rajarshi Gaya in the yajna of his was not even done by the kings of the past and it is not possible that anyone else would be able to do it in the future.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥