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mahabharat 3.95.25: गयायज्ञ में लोग पूछते रहे कि, “अब कौन-कौन लोग बचे हैं जो खाना चाहते हैं?” वहाँ बचे हुए अन्न के पच्चीस पहाड़ रह गए॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.95.25 
गयस्य यज्ञे के त्वद्य प्राणिनो भोक्तुमीप्सव:।
तत्र भोजनशिष्टस्य पर्वता: पञ्चविंशति:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
गयायज्ञ में लोग पूछते रहे कि, “अब कौन-कौन लोग बचे हैं जो खाना चाहते हैं?” वहाँ बचे हुए अन्न के पच्चीस पहाड़ रह गए॥ 25॥
 
‘At the Gaya Yagna people kept asking, “Who are the people left who want to eat now?” Twenty-five mountains of leftover food were left there.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)