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mahabharat 3.95.21: इस प्रकार प्रतिदिन भिखारियों को भोजन और दान दिया जाता था। हे राजन! अन्य ब्राह्मण भी वहाँ सुन्दर ढंग से सजाए गए रसोईघर में भोजन करते थे।   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.95.21 
अहन्यहनि चाप्येवं याचतां सम्प्रदीयते।
अन्ये च ब्राह्मणा राजन् भुञ्जतेऽन्नं सुसंस्कृतम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार प्रतिदिन भिखारियों को भोजन और दान दिया जाता था। हे राजन! अन्य ब्राह्मण भी वहाँ सुन्दर ढंग से सजाए गए रसोईघर में भोजन करते थे।
 
In this manner, food and donations were given to beggars every day. O King! Other Brahmins also ate there in a beautifully prepared kitchen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)