Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.95.2: भरतनन्दन! नरेश्वर! तत्पश्चात पाण्डवों ने गोमती आदि तीर्थों में स्नान करके वहाँ गौ-दान और धन का दान किया॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.95.2 
ततस्तीर्थेषु पुण्येषु गोमत्या: पाण्डवा नृप।
कृताभिषेका: प्रददुर्गाश्च वित्तं च भारत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! नरेश्वर! तत्पश्चात पाण्डवों ने गोमती आदि तीर्थों में स्नान करके वहाँ गौ-दान और धन का दान किया॥2॥
 
Bharatnandan! Nareshwar! Thereafter, after taking bath in the holy places of pilgrimage of Gomti, the Pandavas donated cattle and wealth there*॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)