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शमठ उवाच
अमूर्तरयस: पुत्रो गयो राजर्षिसत्तम:।
पुण्यानि यस्य कर्माणि तानि मे शृणु भारत॥ १८॥
अनुवाद
शमथ ने कहा- भरतनंदन युधिष्ठिर! अमृतराय का पुत्र गय राजाओं में श्रेष्ठ था। उसके कर्म अत्यंत पुण्यमय और पवित्र थे। मैं उनका वर्णन कर रहा हूँ, सुनो-
Shamatha said— Bharatanandan Yudhishthira! Gaya, son of Amrutaraaya, was the best among the kings. His deeds were very pious and holy. I am describing them, listen—
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥