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mahabharat 3.95.18: शमथ ने कहा- भरतनंदन युधिष्ठिर! अमृतराय का पुत्र गय राजाओं में श्रेष्ठ था। उसके कर्म अत्यंत पुण्यमय और पवित्र थे। मैं उनका वर्णन कर रहा हूँ, सुनो-   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.95.18 
शमठ उवाच
अमूर्तरयस: पुत्रो गयो राजर्षिसत्तम:।
पुण्यानि यस्य कर्माणि तानि मे शृणु भारत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
शमथ ने कहा- भरतनंदन युधिष्ठिर! अमृतराय का पुत्र गय राजाओं में श्रेष्ठ था। उसके कर्म अत्यंत पुण्यमय और पवित्र थे। मैं उनका वर्णन कर रहा हूँ, सुनो-
 
Shamatha said— Bharatanandan Yudhishthira! Gaya, son of Amrutaraaya, was the best among the kings. His deeds were very pious and holy. I am describing them, listen—
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)