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mahabharat 3.95.17: उनमें शमथ नामक एक विद्वान ब्राह्मण भी थे, जिन्होंने अपनी शिक्षा पूर्ण कर ली थी और स्नातक की उपाधि प्राप्त कर ली थी। उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने का व्रत लिया था। हे राजन! शमथ ने अमृतराय के पुत्र महाराज गय की कथा इस प्रकार सुनाई।   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.95.17 
तत्र विद्याव्रतस्नात: कौमारं व्रतमास्थित:।
शमठोऽकथयद् राजन्नामूर्तरयसं गयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उनमें शमथ नामक एक विद्वान ब्राह्मण भी थे, जिन्होंने अपनी शिक्षा पूर्ण कर ली थी और स्नातक की उपाधि प्राप्त कर ली थी। उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने का व्रत लिया था। हे राजन! शमथ ने अमृतराय के पुत्र महाराज गय की कथा इस प्रकार सुनाई।
 
Among them was a learned Brahmin named Shamath who had completed his studies and had become a graduate. He had taken a vow to remain celibate throughout his life. O King! Shamath narrated the story of Maharaja Gaya, son of Amrutaraaya, in this manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)