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mahabharat 3.95.12: क्योंकि वहाँ स्वयं सनातन धर्मराज निवास करते हैं। राजन! सभी नदियाँ वहाँ प्रकट हुई हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.95.12 
उवास च स्वयं तत्र धर्मराज: सनातन:।
सर्वासां सरितां चैव समुद्भेदो विशाम्पते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि वहाँ स्वयं सनातन धर्मराज निवास करते हैं। राजन! सभी नदियाँ वहाँ प्रकट हुई हैं।
 
Because Sanatan Dharamraj himself resides there. King! All the rivers have appeared there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)