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mahabharat 3.95.10-11: वहाँ एक और पर्वत है जो महान ऋषियों द्वारा सेवित है, पवित्र चोटियों वाला है, दिव्य और पवित्र है तथा अत्यंत पवित्र तीर्थ है। वहाँ उत्कृष्ट ब्रह्म सरोवर है जहाँ भगवान अगस्त्य मुनि यम से मिलने आए थे। 10-11।   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  3.95.10-11 
दिव्यं पवित्रकूटं च पवित्रं धरणीधरम्॥ १०॥
ऋषिजुष्टं सुपुण्यं तत् तीर्थं ब्रह्मसरोत्तमम्।
अगस्त्यो भगवान् यत्र गतो वैवस्वतं प्रति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वहाँ एक और पर्वत है जो महान ऋषियों द्वारा सेवित है, पवित्र चोटियों वाला है, दिव्य और पवित्र है तथा अत्यंत पवित्र तीर्थ है। वहाँ उत्कृष्ट ब्रह्म सरोवर है जहाँ भगवान अगस्त्य मुनि यम से मिलने आए थे। 10-11।
 
There is another mountain there which is served by great sages, has holy peaks, is divine and sacred and is a very sacred pilgrimage. There is the excellent Brahma Sarovar where Lord Agastya Muni had come to meet Yama. 10-11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)