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mahabharat 3.94.7: हे भरतनन्दन! देवता तो स्नान करने के लिए तीर्थों में प्रवेश कर गए, परन्तु दैत्य वहाँ नहीं गए। दैत्यों में अधर्मजनित अभिमान पहले ही प्रवेश कर चुका था।   |   mahabharat अध्याय 3.94: देवताओं और धर्मात्मा राजाओंका उदाहरण देकर महर्षि लोमशका युधिष्ठिरको अधर्मसे हानि बताना और तीर्थयात्राजनित पुण्यकी महिमाका वर्णन करते हुए आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 94: देवताओं और धर्मात्मा राजाओंका उदाहरण देकर महर्षि लोमशका युधिष्ठिरको अधर्मसे हानि बताना और तीर्थयात्राजनित पुण्यकी महिमाका वर्णन करते हुए आश्वासन देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.94.7 
तीर्थानि देवा विविशुर्नाविशन् भारतासुरा:।
तानधर्मकृतो दर्प: पूर्वमेव समाविशत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! देवता तो स्नान करने के लिए तीर्थों में प्रवेश कर गए, परन्तु दैत्य वहाँ नहीं गए। दैत्यों में अधर्मजनित अभिमान पहले ही प्रवेश कर चुका था।
 
O Bharatanandan! The gods entered the holy places to bathe, but the demons did not go there. The pride born of unrighteousness had already entered the demons. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)