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mahabharat 3.94.6: हे प्रभु! मैंने प्रथम देवयुग में यह सब अपनी आँखों से देखा है। देवताओं ने धर्म पर प्रेम किया और दैत्यों ने उसे त्याग दिया॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.94: देवताओं और धर्मात्मा राजाओंका उदाहरण देकर महर्षि लोमशका युधिष्ठिरको अधर्मसे हानि बताना और तीर्थयात्राजनित पुण्यकी महिमाका वर्णन करते हुए आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 94: देवताओं और धर्मात्मा राजाओंका उदाहरण देकर महर्षि लोमशका युधिष्ठिरको अधर्मसे हानि बताना और तीर्थयात्राजनित पुण्यकी महिमाका वर्णन करते हुए आश्वासन देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.94.6 
पुरा देवयुगे चैव दृष्टं सर्वं मया विभो।
अरोचयन् सुरा धर्मं धर्मं तत्यजिरेऽसुरा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैंने प्रथम देवयुग में यह सब अपनी आँखों से देखा है। देवताओं ने धर्म पर प्रेम किया और दैत्यों ने उसे त्याग दिया॥6॥
 
O Lord! I have seen all this with my own eyes in the first Dev Yuga. The Gods showed love for Dharma and the demons abandoned it. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)