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जनमेजय! वीर पाण्डव आवश्यक अस्त्र-शस्त्र लेकर, कमर में तलवार बाँधकर, पीठ पर तरकश बाँधकर, हाथ में बाण लेकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके वहाँ से चले।
Janamejaya! The valiant Pandavas, taking the necessary weapons, tying swords around their waists, quiver on their backs, arrows in their hands, proceeded from there facing the east.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां त्रिनवतितमोऽध्याय:॥ ९३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राविषयक तिरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥