श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 93: ऋषियोंको नमस्कार करके पाण्डवोंका तीर्थयात्राके लिये विदा होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.93.20 
ऋषय ऊचु:
युधिष्ठिर यमौ भीम मनसा कुरुतार्जवम्।
मनसा कृतशौचा वै शुद्धास्तीर्थानि यास्यथ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने कहा - युधिष्ठिर! भीमसेन! नकुल! और सहदेव! तुम लोग तीर्थों के प्रति भक्तियुक्त सरल मन रखो। मन को शुद्ध करके पवित्र मन से तीर्थों में जाओ॥20॥
 
The sages said – Yudhishthir! Bhimsen! Nakul! And Sahadev! You people should have a simple mind with devotion towards the pilgrimage sites. Having purified your mind, go to pilgrimages with a pure mind. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)