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mahabharat 3.92.8: राजन! इस प्रकार इन्द्र के वचन और अर्जुन के अनुरोध से मैं तुम्हें सब प्रकार के भय से बचाते हुए तुम्हारे साथ तीर्थों में भ्रमण करूँगा॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.92.8 
सोऽहमिन्द्रस्य वचनान्नियोगादर्जुनस्य च।
रक्षमाणो भयेभ्यस्त्वां चरिष्यामि त्वया सह॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजन! इस प्रकार इन्द्र के वचन और अर्जुन के अनुरोध से मैं तुम्हें सब प्रकार के भय से बचाते हुए तुम्हारे साथ तीर्थों में भ्रमण करूँगा॥8॥
 
Rajan! In this way, at the words of Indra and the request of Arjun, I will travel with you in pilgrimages, protecting you from all kinds of fear. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)