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mahabharat 3.92.7: ‘पहाड़ों के समान विशाल अनेक भूत-प्रेत और राक्षस तुम्हारे बिना राजा युधिष्ठिर के पास सुरक्षित रूप से नहीं आ सकेंगे।’ ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.92.7 
यातुधाना हि बहवो राक्षसा: पर्वतोपमा:।
त्वयाभिगुप्तं कौन्तेयं न विवर्तेयुरन्तिकम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘पहाड़ों के समान विशाल अनेक भूत-प्रेत और राक्षस तुम्हारे बिना राजा युधिष्ठिर के पास सुरक्षित रूप से नहीं आ सकेंगे।’ ॥7॥
 
‘Many ghosts and demons, who are as huge as mountains, will not be able to come to King Yudhishthira safely without you.' ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)