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mahabharat 3.92.6: ‘द्विजश्रेष्ठ! जिस प्रकार दधीच ने देवराज इन्द्र की और महर्षि अंगिरा ने सूर्य की रक्षा की है, उसी प्रकार आप दैत्यों से कुन्तीकुमारों की रक्षा करें॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.92.6 
दधीच इव देवेन्द्रं यथा चाप्यङ्गिरा रविम्।
तथा रक्षस्व कौन्तेयान् राक्षसेभ्यो द्विजोत्तम॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘द्विजश्रेष्ठ! जिस प्रकार दधीच ने देवराज इन्द्र की और महर्षि अंगिरा ने सूर्य की रक्षा की है, उसी प्रकार आप दैत्यों से कुन्तीकुमारों की रक्षा करें॥6॥
 
‘Dwijashrestha! Just as Dadhich has protected Devraj Indra and Maharishi Angira has protected the Sun, in the same way you protect the Kuntikumars from the demons. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)