Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.92.4: ‘जैसे महाराज युधिष्ठिर तीर्थस्थानों में जाकर वहाँ गौओं का दान करते हैं, उसी प्रकार तुम्हें भी सब प्रकार से प्रयत्न करना चाहिए।’ यह बात अर्जुन ने मुझसे कही थी॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.92.4 
यथा तीर्थानि गच्छेत गाश्च दद्यात् स पार्थिव:।
तथा सर्वात्मना कार्यमिति मामर्जुनोऽब्रवीत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘जैसे महाराज युधिष्ठिर तीर्थस्थानों में जाकर वहाँ गौओं का दान करते हैं, उसी प्रकार तुम्हें भी सब प्रकार से प्रयत्न करना चाहिए।’ यह बात अर्जुन ने मुझसे कही थी॥4॥
 
'Just as Maharaja Yudhishthir goes to holy places and donates cows there, you should make every effort in the same way.' Arjun told me this. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)