Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.92.27: तत्पश्चात् कुन्तीनन्दन राजा युधिष्ठिर कुछ ब्राह्मणों और लोमशजी के साथ काम्यक वन में तीन रातों तक बड़े सुख से रहे॥27॥ | mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: कुन्तीसुतो राजा लघुभिर्ब्राह्मणै: सह।
लोमशेन च सुप्रीतस्त्रिरात्रं काम्यकेऽवसत्॥ २७॥
अनुवाद
तत्पश्चात् कुन्तीनन्दन राजा युधिष्ठिर कुछ ब्राह्मणों और लोमशजी के साथ काम्यक वन में तीन रातों तक बड़े सुख से रहे॥27॥
Thereafter, Kuntinandan King Yudhishthir along with some Brahmins and Lomashji stayed in Kamyaka forest for three nights very happily. 27॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां द्विनवतितमोऽध्याय:॥ ९२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राविषयक बानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥