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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.92.25 
वैशम्पायन उवाच
ततो भूयिष्ठश: पौरा गुरुभारप्रपीडिता:।
विप्राश्च यतयो मुख्या जग्मुर्नागपुरं प्रति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: जनमेजय, तब बहुत से नागरिक, ब्राह्मण और ऋषिगण मानसिक दुःख के महान् बोझ से पीड़ित होकर हस्तिनापुर गये।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya, then many citizens, Brahmins and sages, afflicted with the great burden of mental sorrow, went to Hastinapur.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)