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mahabharat 3.92.22-24: जो नगरवासी राजाभक्तिपूर्वक मेरे पीछे आए हैं, वे अब राजा धृतराष्ट्र के पास जाएँ। वे समय आने पर उन्हें उपयुक्त जीविका प्रदान करेंगे। यदि राजा धृतराष्ट्र उनके लिए उपयुक्त जीविका की व्यवस्था न करें, तो पांचाल नरेश द्रुपद, जो हमारे प्रिय तथा हमारे हितैषी हैं, अवश्य ही आप सबको जीविका प्रदान करेंगे।॥ 22-24॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 22-24
 
 
श्लोक  3.92.22-24 
ये चाप्यनुरता: पौरा राजभक्तिपुर:सरा:।
धृतराष्ट्रं महाराजमभिगच्छन्तु ते च वै॥ २२॥
स दास्यति यथाकालमुचिता यस्य या भृति:।
स चेद् यथोचितां वृत्तिं न दद्यान्मनुजेश्वर:॥ २३॥
अस्मत्प्रियहितार्थाय पाञ्चाल्यो व: प्रदास्यति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो नगरवासी राजाभक्तिपूर्वक मेरे पीछे आए हैं, वे अब राजा धृतराष्ट्र के पास जाएँ। वे समय आने पर उन्हें उपयुक्त जीविका प्रदान करेंगे। यदि राजा धृतराष्ट्र उनके लिए उपयुक्त जीविका की व्यवस्था न करें, तो पांचाल नरेश द्रुपद, जो हमारे प्रिय तथा हमारे हितैषी हैं, अवश्य ही आप सबको जीविका प्रदान करेंगे।॥ 22-24॥
 
The citizens of the city who have followed me out of devotion to the king should now go to King Dhritarashtra. He will provide them with suitable livelihood in due course. If King Dhritarashtra does not arrange for suitable livelihood, then Panchala King Drupada, being dear to us and doing good to us, will certainly provide livelihood to you all.॥ 22-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)