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mahabharat 3.92.21: जो लोग रसोइयों की सेवा की प्रतीक्षा कर रहे हैं और जिनके लिए मैंने अलग-अलग बाँटकर उनकी जीविका का उचित प्रबंध कर दिया है, वे सब लोग अपने घर लौट जाएँ ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.92.21 
तेऽपि सर्वे निवर्तन्तां ये च सूदानुयायिन:।
मया यथोचिताजीव्यै: संविभक्ताश्च वृत्तिभि:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो लोग रसोइयों की सेवा की प्रतीक्षा कर रहे हैं और जिनके लिए मैंने अलग-अलग बाँटकर उनकी जीविका का उचित प्रबंध कर दिया है, वे सब लोग अपने घर लौट जाएँ ॥ 21॥
 
Those who are waiting for the services of cooks and for whom I have made proper arrangements for their livelihood by dividing them separately, all of them should go back home. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)