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mahabharat 3.92.13: हे कुन्तीपुत्र, हे पाण्डुपुत्र! जैसे राजा भगीरथ प्रसिद्ध हुए, जैसे गय आदि महान ऋषि हुए और जैसे राजा ययाति प्रसिद्ध हुए, वैसे ही तुम भी प्रसिद्ध होगे।   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.92.13 
यथा भगीरथो राजा राजानश्च गयादय:।
यथा ययाति: कौन्तेय तथा त्वमपि पाण्डव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र, हे पाण्डुपुत्र! जैसे राजा भगीरथ प्रसिद्ध हुए, जैसे गय आदि महान ऋषि हुए और जैसे राजा ययाति प्रसिद्ध हुए, वैसे ही तुम भी प्रसिद्ध होगे।
 
O son of Kunti, O son of Pandu! Just like King Bhagirath became famous, just like Gaya etc. became great sages and just like King Yayati became famous, you too will become famous.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)