Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.92.11: हे कुरुपुत्र! जो मनुष्य सरल नहीं है, जिसने अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं किया है, जो ज्ञान से अज्ञानी और पापात्मा है तथा जिसकी बुद्धि छल-कपट से भरी हुई है, ऐसा मनुष्य (श्रद्धा के अभाव के कारण) तीर्थों में स्नान नहीं करता॥11॥ | mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नानृजुर्नाकृतात्मा च नाविद्यो न च पापकृत्।
स्नाति तीर्थेषु कौरव्य न च वक्रमतिर्नर:॥ ११॥
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! जो मनुष्य सरल नहीं है, जिसने अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं किया है, जो ज्ञान से अज्ञानी और पापात्मा है तथा जिसकी बुद्धि छल-कपट से भरी हुई है, ऐसा मनुष्य (श्रद्धा के अभाव के कारण) तीर्थों में स्नान नहीं करता॥11॥
O son of Kuru! A person who is not simple, who has not controlled his mind and senses, who is ignorant of knowledge and sinful soul and whose intellect is filled with deceit, such a person (due to lack of faith) does not take bath in holy places. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥