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mahabharat 3.92.1-2: लोमश ऋषि कहते हैं- युधिष्ठिर! मेरे जाते समय अर्जुन ने जो कहा था, उसे सुनो। उन्होंने कहा- 'तपधान! तुम मेरे बड़े भाई युधिष्ठिर को धर्मानुसार किसी राजदेवी के साथ मिला दो। तुम श्रेष्ठ धर्म और तप को जानते हो। तुम वैभवशाली राजाओं के सनातन धर्म को भी पूर्णतः जानते हो।॥ 1-2॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  3.92.1-2 
लोमश उवाच
धनंजयेन चाप्युक्तं यत् तच्छृणु युधिष्ठिर।
युधिष्ठिरं भ्रातरं मे योजयेर्धर्म्यया श्रिया॥ १॥
त्वं हि धर्मान् परान् वेत्थ तपांसि च तपोधन।
श्रीमतां चापि जानासि धर्मं राज्ञां सनातनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
लोमश ऋषि कहते हैं- युधिष्ठिर! मेरे जाते समय अर्जुन ने जो कहा था, उसे सुनो। उन्होंने कहा- 'तपधान! तुम मेरे बड़े भाई युधिष्ठिर को धर्मानुसार किसी राजदेवी के साथ मिला दो। तुम श्रेष्ठ धर्म और तप को जानते हो। तुम वैभवशाली राजाओं के सनातन धर्म को भी पूर्णतः जानते हो।॥ 1-2॥
 
Sage Lomash says- Yudhishthira! Listen to what Arjuna told me when I was about to leave. He said- 'Tapadhan! You should unite my elder brother Yudhishthira with a royal goddess in accordance with Dharma. You know the best of Dharmas and austerities. You also have full knowledge of the Sanatan Dharma of prosperous kings.॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)