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mahabharat 3.91.6: 'वहाँ मैंने आपके वीर भाई सव्यसाची अर्जुन को भी देखा, जो इंद्र के सिंहासन के आधे भाग पर बैठे थे। उन्हें इस अवस्था में देखकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ।   |   mahabharat अध्याय 3.91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.91.6 
तव च भ्रातरं वीरमपश्यं सव्यसाचिनम्।
शक्रस्यार्धासनगतं तत्र मे विस्मयो महान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'वहाँ मैंने आपके वीर भाई सव्यसाची अर्जुन को भी देखा, जो इंद्र के सिंहासन के आधे भाग पर बैठे थे। उन्हें इस अवस्था में देखकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ।
 
'There I also saw your brave brother Savyasachi Arjuna, who was sitting on half of Indra's throne. I was very surprised to see him in this condition.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)