Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.91.25: "भरतनन्दन! ये ब्रह्मर्षि लोमश तुम्हें तीर्थों में प्राप्त होने वाले तप के समस्त फल बताएँगे। तुम्हें इस पर विश्वास करना चाहिए। अन्यथा नहीं सोचना चाहिए।" 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.91.25 
यच्च किंचित् तपोयुक्तं फलं तीर्थेषु भारत।
ब्रह्मर्षिरेष ब्रूयात् ते तच्छ्रद्धेयं न चान्यथा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
"भरतनन्दन! ये ब्रह्मर्षि लोमश तुम्हें तीर्थों में प्राप्त होने वाले तप के समस्त फल बताएँगे। तुम्हें इस पर विश्वास करना चाहिए। अन्यथा नहीं सोचना चाहिए।" 25॥
 
"Bharatanandan! This Brahmarishi Lomash will tell you all the results of penance that you get in pilgrimages. You should believe in it. You should not think otherwise." 25॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशसंवादे एकनवतितमोऽध्याय:॥ ९१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें युधिष्ठिरलोमश-संवादविषयक इक्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)