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mahabharat 3.91.20: "भरत सर्वश्रेष्ठ है! मैं कर्ण को अच्छी तरह जानता हूँ। वह सत्यवादी, अति उत्साही, अति पराक्रमी और अत्यंत शक्तिशाली है।"   |   mahabharat अध्याय 3.91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.91.20 
अहं च कर्णं जानामि यथावद् भरतर्षभ।
सत्यसंधं महोत्साहं महावीर्यं महाबलम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
"भरत सर्वश्रेष्ठ है! मैं कर्ण को अच्छी तरह जानता हूँ। वह सत्यवादी, अति उत्साही, अति पराक्रमी और अत्यंत शक्तिशाली है।"
 
“Bhaarat's best! I know Karna very well. He is truthful, very enthusiastic, very valiant and very powerful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)