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mahabharat 3.91.15: इस प्रकार शस्त्रविद्या में निपुण होकर कुन्तीकुमार ने गन्धर्ववेद (संगीत विद्या) भी प्राप्त कर ली। अब आपके छोटे भाई भीमसेन का छोटा भाई अर्जुन वहाँ अत्यन्त सुखपूर्वक रह रहा है॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 3.91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.91.15 
एवं कृतास्त्र: कौन्तेयो गान्धर्वं वेदमाप्तवान्।
सुखं वसति बीभत्सुरनुजस्यानुजस्तव॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शस्त्रविद्या में निपुण होकर कुन्तीकुमार ने गन्धर्ववेद (संगीत विद्या) भी प्राप्त कर ली। अब आपके छोटे भाई भीमसेन का छोटा भाई अर्जुन वहाँ अत्यन्त सुखपूर्वक रह रहा है॥ 15॥
 
‘In this way, after becoming proficient in the art of weapons, Kuntikumar also acquired the Gandharva Veda (the art of music). Now your younger brother Bhimasena's younger brother Arjun is living there very happily.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)